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सच्चा संगीत

सूर्योदय में दो-तीन घंटे बाकी हो। आपके आसपास सभी सो रहे हो। मनुष्य, जीव-जंतु, पेड़-पौधे, किसी में भी कोई हलचल ना हो। ऐसे में आप उठिए। अपने पत्थरों, सीमेंट, लोहे के मकानों से बाहर निकलिए। किसी नदी के किनारे पर जाकर सुखासन, सिद्धासन या पद्मासन में बैठिए। आंखें बंद कीजिए, कमर सीधी कीजिए, हाथों को घुटनों पर रखिए। आपको कुछ देखना नहीं है, आपको कुछ सोचना नहीं है, आपको कुछ करना नहीं है, बस अपने कान खुले रखिए और सुनिए- बहता हुआ जल आपको क्या सुनाता है? मधुर संगीत! ऐसा मधुर संगीत कि पंडित भीमसेन जोशी, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल और अनु मलिक जैसों का संगीत उस संगीत के सामने क्षुद्र नजर आने लगे। तब आप कैसा महसूस करेंगे? क्या आप रेडियो या टेलीविजन के शोर को सुनना पसंद करेंगे? क्या तब भी आपके मन में यह विचार आएंगे कि यदि मैं घर में होता, अपनी रजाई में होता, सामने टेलीविजन चला लेता और उसमें संगीत चलाता तो कितना अच्छा होता? नहीं! कभी नहीं। आप एक बार यह प्रयोग करके तो देखिए। आज से हजारों साल पहले एक ग्रीक दार्शनिक ने कहा था कि संगीत ही एकमात्र ऐसी विधा है जो मन को शांति प्रदान करती है और दर्शन से बड़ा...