श्री राम के जीवन मे झाँका जाए तो हम देखते है कि वशिष्ठ जी के आश्रम में शिक्षा पूर्ण होते ही श्री राम के पास रामराज्य का एक स्पष्ट दृष्टिकोण था। वह यह कि पहले आतताइयों और शत्रुओं से राज्य को सुरक्षित किया जाए। इसका प्रारम्भ उन्होंने महऋषि विश्वामित्र के आश्रम में राक्षशी चाची ताड़का और उनके अनुचरों को मौत के घाट उतार कर आरम्भ कर दिया था और उसके बाद वनवास में रहते हुए दक्षिण तक सभी शत्रुओं का संघार करके ही वापस लौटे। यदि उनके मन में रामराज्य का स्वप्न नही होता तो वें वनवास के समय उत्तर दिशा में किसी हिमालय की कन्दरा में ही गुजार देते! वैसे भी अवध को उत्तर दिशा से कोई खतरा नही था। राम को वन में ही तो निवास करना था फिर दक्षिण में शत्रुओं के बीच जाने की क्या जरूरत थी? अर्थ साफ है पारिवारिक कर्तव्यों के साथ साथ उन्होंने राजधर्म भी निभाया।
आज हमारे शत्रु दक्षिण में नही अपितु उत्तर में है। श्री राम ने तो 14 वर्षो मेही अवध को शत्रुमुक्त कर दिया था किन्तु भारत सरकार तो 71 वर्षो में भी भारत को शत्रुमुक्त नही कर पाई है और हम एक अंतहीन युद्ध के साये में जी रहे हैं।
रामराज्य में बड़ा छोटा कोई न था। श्री राम निषाद के गले मिलते हैं,शबरी के झूठे बेर खाते हैं, केवट से पैर धुलवाते है,आदिवासी वानरों की सेना बनाकर राक्षशों का विनाश करते हैं और फिर विभीषण और सुग्रीव को राजा उनके देश का राजा बनाकर समानता का भाव प्रकट करते हैं। बाद में धोबी के एक ताने मात्र से पत्नी सीता को त्याग देते हैं।
आज आरक्षण ने जातिवाद को समाप्त करने की बजाय बढ़ाने का काम किया है, गरीब महिलाएं कबाड़ की झोपड़ी में भूखी मर रही है,नदियों का पानी पैर धोने लायक ही नही बचा है, आदिवासियों के हाथों में हथियार थमाकर उन्हें नक्सली बनाया जा रहा है और आम जनता कितने ही ताने मार ले, पुतले फूँक ले, प्रदर्शन कर ले,किन्तु सभी दलों के नेता अपने अपने घर की दीवारों में नोट चिनने में लगे हुए हैं। जो थोड़े से धन के लालच को नही त्याग सकते उनसे रामराज्य की उम्मीद लगाना दिन में सपने देखने से अधिक कुछ नही है।
यदि कोई सरकार ईमानदारी से रामराज्य लाना ही चाहती है तो धरती पर सड़को का जाल बाद में बिछाए, पहले शत्रु को ठिकाने लगाए। अकेला पाकिस्तान ठिकाने लग गया तो आतंकवाद, नक्सलवाद आदि को नष्ट करना फिर कठिन न होगा।
यदि रामराज्य लाना ही चाहते हैं तो आरक्षण को पूर्णतः समाप्त कर सबको समान अवसर उपलब्ध कराओ । एक ऐसे समाज के लिए प्रयत्न करो कि जिसमे सभी सब का राजाओ की भांति सम्मान करें ।
यदि रामराज्य लाना ही चाहते हैं तो राजा के कान देश के प्रत्येक नागरिक की बातों पर हो और सतत उन बातों में समन्वय बनाने का प्रयत्न होता रहे।
यदि रामराज्य लाना चाहते ही हो तो भ्रष्टाचार चाहे चोट हो या बड़ा इसकी सजा आजीवन कारावास या मृत्युदण्ड ही हो।
सबके कार्यो का समुचित मूल्य मिले, सब को काम मिले ।
ईमानदारी से अपने कर्तव्य का पालन करने वाला भ्रष्टाचारियों की श्रेणी में शामिल हो।
रामराज्य लाना है तो राम के आदर्शों का राजा और प्रजा पुर्णतः पालन करे ।। न करने वालों के लिए दण्ड कमजोर न हो।


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