तीन दिन से भूखा प्यासा यम के द्वार पर यम की प्रतीक्षा में बैठे बालक के संकल्प से प्रसन्न हो यम ने बालक नचिकेता को तीन वर माँगने को कहा। एकदम आपके सम्मुख ऐसी परिस्थिति आ जाये तो आप क्या मांगेंगे? धन तो एक वर में मिल जाएगा।उसके बाद धन से आप कोई भी भौतिक सुख,वस्तु या विषय खरीद सकते हो, बाकी दो वरों में आप क्या माँग करेंगे? यदि आप नचिकेता के स्थान पर होते तो क्या करते? दो पल पढ़ना बन्द करके सोचिए। जो आपके मन मे आया उसे नीचे के कमेंट बॉक्स में लिखिये और फिर आगे पढ़िए। हाँ! पूरा पढ़ने के बाद अपने कमेंट में कोई परिवर्तन मत करिए।
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नचिकेता ने प्रथम वर यह माँगा कि जब वह यम के पास से वापस जाए तो उसके पिता उद्दालकजी उस पर गुस्सा न करे और उसकी बात पर विश्वास करके उसे गले से लगा ले।
दूसरा वर यह माँगा कि उसे देवों की प्राप्ति कराने वाली अग्निविद्या का ज्ञान दिया जाए ।
और तीसरे वरदान में उस बालक ने तत्वज्ञान प्राप्त करने का वर माँगा।
इतना पढ़ने के बाद क्या आप समझ पाए कि नचिकेता ने क्या माँग लिया?
प्रथम वर:- जीवन की धारा ऐसी है कि इसमें सबको तैरना तो अकेले अकेले है किन्तु बहना एक साथ है। एकसाथ रहने की सबसे छोटी इकाई परिवार है। परिवार से गाँव-समाज है और गांव-समाज से देश-संस्कृति है। अकेले तो मनु भी न रह सके थे। अतः ये जीवन की प्रमुख आवश्यकता है जिसमे मनुष्य अपने चरित्र का निर्माण कर धर्म, अर्थ, काम आदि पुरुषार्थ करते हुए मोक्ष की ओर अग्रसर होता है।अकेले मनुष्य का व्यवहार कभी चरित्र नही बनता।यदि आप अकेले है तो चाहे खड़े होकर खाएं या लेटकर, कोई फर्क नही पड़ता। आप नाचते हुए नहाए या बैठकर, कोई फर्क नहीं पड़ता। आपका व्यवहार चरित्र तब बनता है जब उससे कोई अन्य व्यक्ति प्रभावित होता है। आपके क्रियाकलाप व्यक्तियों पर यदि सकारात्मक प्रभाव डालते हैं तो आप अच्छे चरित्र वाले है और यदि आपके व्यवहार व्यक्तियों पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं तो आप बुरे चरित्र के हो जाते हैं। सकारात्मक प्रभाव वाला व्यवहार आपका धर्म है। उसी धर्म को निभाते हुए धन अर्जन करना अर्थ है और धर्म के अनुरूप इस विश्व मे जीने के लिए जिन सुविधाओं की इच्छा की जाती है वही काम है। यें तीन जीवन के पुरुषार्थ हैं। इन पुरुषार्थों के लिए हमें समाज और परिवार की आवश्यकता होती है।नचिकेता के पहले वरदान में यह सब कुछ माँग लिया।
दूसरा वर ईश्वर ने मनुष्य को एक ऐसा वरदान देकर पृथ्वी पर भेजा है जो अन्य किसी जीव के पास नही है। वह है बुद्धि। बुद्धि से मानव जान सका है कि सृष्टि में उसका स्थान क्या है! मनुष्य ने जाना कि जीवन मे तप का क्या महत्व है। मनुष्य ने जाना कि जैसे सोना अग्नि में तपकर कुन्दन बनता है वैसे ही मनुष्य भी कर्तव्यों के तप की अग्नि में जलकर देवता बन सकता है।जैसे प्राणवायु ,जल, पृथ्वी, आकाश और अग्नि निःस्वार्थ भाव से हमे जीवन देकर देवत्व के पद पर विराजमान है वैसे ही मनुष्य भी देवत्व को प्राप्त कर सकता है। उस तप के ज्ञान को की सम्भवतः उपनिषदों में अग्निविद्या कई संज्ञा दी गयी है।माना भी जाता है कि यज्ञ की अग्नि स्वर्ग को ले जाने वाला देवता है। अग्नि की इसी संदर्भ में वेदों में स्तुति की गई है। अतः दूसरे वर में नचिकेता ने मनुष्यत्व से देवत्व प्राप्त करने का ज्ञान माँग लिया।
तीसरा वर
जीवन क्या है? जन्म क्या है? मृत्यु क्या है? हमने जो जीवन पाया है उसका उद्देश्य क्या है? किसलिए हम इस विश्व में आये हैं? इस विश्व मे जन्म लेने से पहले हम कहाँ थे? वहाँ से हमें यहाँ किसने और क्यों भेजा? क्या हम इस विश्व में स्वतंत्र हैं या हमारी डोर किसी अन्य के हाथ मे है? यदि किसी अन्य के हाथ मे है तो हमें वह प्रत्यक्ष क्यों नही होता?
ऐसे अनगिनत प्रश्न हैं जिनके उत्तर खोजने के लिए सदियों से ऋषियों ने,मुनियों ने, मनीषियों ने, सारा जीवन लगा दिया। वह तत्व क्या है जिसका ज्ञान प्राप्त होने के बाद यें सभी प्रश्न लक्ष्यविहीन हो जाते है? उसका ज्ञान प्राप्त करना क्या सरल है?
नचिकेता का तीसरा वरदान उस परमतत्व को जानने की इच्छा ही है जिसे जानकर कुछ जानना शेष नही रह जाता।
अचानक आये अवसर से पृथ्वी लोक, देवलोक और परमतत्व को प्राप्त करके परमसुख को पाने की नचिकेता की बुद्धिमत्ता को कोटि कोटि नमन है। यह बुद्धि एक दो माह या एक दो वर्ष या एक दो दशक में नहीं आ जाती। ये तो शताब्दियों के संस्कारों का समूह है जो पीढ़ी दर पीढ़ी संजोये जाते हैं और अग्रसर किये जाते हैं।
केवल राजा हरिश्चन्द्र का एक नाटक देखकर ही गाँधी जी सत्यवादी नही हुए। यदि उनमें सत्यवादी संस्कार न होते तो नाटक का उन पर प्रभाव ही न पड़ता।
आप भी अपने बच्चों को ऐसे संस्कार दीजिये कि वे अपने आप की, अपनी संस्कृति की और अपने धर्म की रक्षा करते हुए पुरुषार्थ करते हुए मोक्ष को प्राप्त हों, न कि TV पर नग्नता का नृत्य और अश्लीलता उनके आदर्श बने।। उन्हें नचिकेता बनाइये न कि सलमान या शाहरुख
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नमस्कार
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