दोनों ऋषियों ने हिन्दू धर्म के लुप्तप्राय ज्ञान को पुनर्प्रतिष्ठा प्रदान की।
दोनों ने पाखण्ड का खुलकर विरोध किया।
दोनों ने हिन्दू धर्म में पुनर्जागरण का मार्ग प्रशस्त किया।
दोनों ने वेद के महत्व को समझा और वेदार्थ को जगतपटल पर रखा।
दोनों ने हिन्दू धर्म के सनातन सत्यज्ञान का अन्वेषण किया और अपने चरित्र से हिंदुत्व के चरित्र को दुनिया के सामने रखा।
दोनों ने सनातनी मूल्यों को आत्मसात करते हुए समाज सेवा करते हुए अपने जीवन बलिदान किये।
फिर ऐसा क्यों है कि स्वामी दयानंद चन्द हिन्दुओं(आर्य समाजियों) के ही प्रेरणास्रोत रह गए और स्वामी विवेकानन्द राष्ट्र के युवाओं के प्रेरणास्रोत ???
कृपया सभी प्रबुद्ध लोग इस बहस का भाग बनें।।


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