आज गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सर्वप्रथम आप सभी जिज्ञासुओं को कोटि कोटि शुभकामनायें ।
गुरु का हमारे जीवन में बड़ा महत्व है। गुरु हमारे जीवन में ज्ञान का प्रकाश भर देते है जिसकी रोशनी में हम सारा जीवन ख़ुशी ख़ुशी गुजार देने में सक्षम हो जाते है
गुरु एक बड़ा शब्द है। इसका अर्थ उससे कहीं अधिक बड़ा है जितना हम प्रायः समझते है।गुरु केवल एक व्यक्ति ही नही होता, अपितु प्रकृति में जो भी जड़ चेतन हमें ज्ञान के प्रकाश से भर दे वह सब जेके सब हमारे गुरु है।जब हम दीपक से स्वयं जलकर दूसरों के जीवनपथ में उजाला करना सीख जाये तो वह दीपक भी हमारा गुरु है।जब हम हवा से दूसरों को शीतलता प्रदान करना सीख जाएँ तो हवा हमारी गुरु है। जब हम पक्षी से उड़ान भरना सीख जाये तो पक्षी हमारे गुरु है। और जीवन में सबसे पहले ज्ञान देने वाली हमारी माता हमारी गुरु हैहाथ पकड़कर जीवनपथ का प्रथम दर्शन कराने वाले हमारे पिता हमारे गुरु है। ऋषियों राजाओं और जानवरों की कहानियों से जीवन का सार समझाने वाली दादी व नानी हमारी गुरु है। हमारा परिवार, गांव , देश हमारे गुरु है। केवल इतना ही नही जिन देवताओं ने हमे विभिन्न प्रकार से अनुग्रहीत किया है , वो चाहे ब्रह्मा जी हो, विष्णुजी हो या महेश्वर जैसे अन्य देव हो,चाहे स्वयं साक्षात् परब्रह्म ही क्यों न हो , सभी हमारे गुरु हैऔर गुरु होने के नाते सभी वन्दनीय है, पूजनीय है। सदियों दे प्रकृति और देवताओं की पूजा इसलिए नही हो रही है कि हम उनसे डरते थे जैसे कि कुछ ईतिहासकार हमारी समृद्ध संस्कृति को बदनाम करने के लिए कहते रहते है; अपितु इसलिए हो रही है कि हमे उनसे ज्ञान और जीवन के लिए वांछित वस्तुएँ प्राप्त होती रही है।किंतु जब हमारे ऋषि मुनि उद्धघोष करते है कि
गुरुर्विष्णु गुरुर्ब्रह्मा गुरुर देवो महेश्वरः,
गुरुर साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवै नमः।
तब कुछ धूर्त लोग जो स्वयं को पाखण्ड द्वारा ईश्वर बनाने पर तुले है, कहने लगते है कि वे स्वयं तो गुरु है और उनमें ही ब्रह्म विष्णु और महेश समाये है किसी अन्य में नही इसलिए केवल वे ही पूजनीय है । वे लोग ऋषियों के इस अमर उद्धघोष के शब्दों को तो सही पकड़ते है किंतु अर्थ को भटक कर अपने पक्ष में कर लेते है ।और भोले लोग उनकी बात को सत्य मानकर उन पर अपना सब कुछ लुटा बैठते है। अतः ऐसे धूर्त लोगों से बचने की आवश्यकता है।
इसके लिए आवश्यक है कि अपनी जड़ो को स्वयं जानों। किसी अन्य पर बिल्कुल विश्वास मत करो। स्वयं अध्ययन करो और सभी बातों को अपनी बुद्धि द्वारा तोलकर विश्वास करो। स्वयं पर विश्वास करो। फिर देखो सत्य की एक एक परत आपके समक्ष खुलती चली जाएँगी और आप का दृढ विश्वास आपको विश्वगुरु बना देगा।
शुभ गुरुपूर्णिमा।


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